आज पुनः भारत को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से वह समर्थन, सहयोग और शक्ति मिली जिसकी आवश्यकता भारतीयों को थी। यह कार्यक्रम उस समय आया है जब भारत एक और 1999 में संपन्न कारगिल युद्ध का विजय दिवस मना रहा तो वही कोरोना, बाढ़ और वैश्विक महामारी कोरोना से भारत समेत विश्व ग्रसित है।

आज प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में भारतीय नागरिकों और भारत माता के वीर सपूतों को महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी के विचारों से अवगत कराते हुए स्मरण दिलाया की वाजपेयी जी ने लाल किले से एक बार कहा था कि विपरीत परिस्थितियों में एक बार हमें यह सोचना चाहिए की दुर्गम स्थितियों में भारत माता की सुरक्षा करने वाले जवान किस प्रकार अपने कर्तव्य पर अडिग है।कारगिल और कारगिल विजय की यादों से परिचय कराते हुए पुनः अपने अनुचित व्यवहार के लिए विख्यात पड़ोसी राष्ट्रों को सचेत करते हुए भारत की शौर्य गाथा का परिचय दिया। उन्होंने भारत वासियों से और भारत के माताओं बहनों युवाओं सभी से आग्रह किया कि अपने विजय दिवस को उल्लास और उमंग के साथ एक दूसरे से बांटे और कोरोना महामारी को बिना भूले परस्पर सहयोग बनाए रखें।

उन्होंने एक बार पुनः अपने संबोधन में कोरोना महामारी के अस्त्र जैसे मास्क, चेहरे पर गमछा,नियमित रूप से हाथ धोना सामाजिक दूरी का पालन और स्वच्छता को बनाए रखना इत्यादि बातों पर जोर दिया और भारतीयों से इसका पालन करने का आग्रह किया।

इसी कड़ी में वोकल फॉर लोकल के अपने विनती को दोहराते हुए आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भरता पर बल दिया ।

इस समय जब भारत को मानसून की आवश्यकता है, ठीक उसी समय कुछ राज्यों में बाढ़ की स्थिति विकराल रूप धारण कर रही है। अतः इस परिस्थिति में संयम और सहयोग से काम लें।

कुछ दिनों में रक्षाबंधन का त्यौहार भी आने वाला है जो सौहार्द और सद्भाव का प्रतीक है और उन्होंने कहा के कुछ सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी इस रक्षाबंधन पर्व को अनूठे तरीके से मनाने की योजना बना रहे हैं जो सदैव सराहनीय है जिससे पर्व भी हो उल्लास भी बना रहे और बीमारी का संक्रमण भी तेज ना हो।

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