कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते केंद्र सरकार ने लोगों की

 सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देशवयापी लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ दिया है। साथ ही साथ सुसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों व छात्रों को उनके घर भेजने की भी पूरी तैयारी कर दी है। दरअसल आपको बता दें कि ये कदम उठाकर केंद्र सरकार ने छात्रों को व मजदूरों को बड़ी राहत दी है। रेलवे को स्‍पेशल ट्रेनें चलाकर ऐसे लोगों को उनके गृह राज्‍यों तक पहुंचाने को कहा गया है। इसके लिए ‘श्रमिक स्‍पेशल’ ट्रेनें शुरू की गई हैं। दरअसल राज्य सरकारों ने स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के तहत अनुरोध किया था कि ट्रेनों को पॉइंट-टू-पॉइंट चलाया जाए। यानी ये ट्रेनें बीच में कहीं नहीं रुकेंगी। पहले दिन, शुक्रवार को अलग-अलग रूटों पर छह स्‍पेशल ट्रेनें चलाई गईं। इन ट्रेनों के चलने के लिए दोनों राज्‍यों, यानी जहां से प्रवासियों को जाना है और जहां पहुंचना है, दोनों  की सहमति जरूरी होगी। इन ट्रेनों में आम यात्रियों को बैठने नहीं दिया जाएगा। सरकार ने कुछ शर्तें भी तय की हैं जिनके पालन के बाद ही ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।

आइए जानते हैं कि इन ट्रेनों में कौन-कौन सफर कर सकते हैं और क्‍या व्‍यवस्‍था होगी।

इन स्‍पेशल ट्रेन्स में जो सफर करेंगे उनकी लिस्‍ट राज्‍य सरकार बनाएगी। सबसे पहले प्रवासी मजदूरों, टूरिस्‍ट्स, स्‍टूडेंट्स और तीर्थयात्रियों को अपने गृह राज्‍य के पास आवेदन करना होगा। फिर वहां के नोडल ऑफिसर जो लिस्‍ट तैयार करेंगे, वह रेलवे को सौंपी जाएगी। फिर स्‍टेशन पर केवल उन्‍हीं लोगों से पहुंचने को कहा जाएगा जिन्‍हें प्रशासन चुनेगा। इसके अलावा किसी को ट्रेन्‍स में बैठने नहीं दिया जाएगा। इन ट्रेनों से सफर करने वाले हर यात्री को फेस मास्‍क लगाना होगा।

यही नहीं, स्‍टेशन से लेकर पूरे सफर के दौरान सोशल डिस्‍टेंसिंग फॉलो करना अनिवार्य है। जिस राज्‍य से ट्रेन चलेगी, वहां स्‍टेशन पर यात्रियों की स्‍क्रीनिंग का इंतजाम होगा। सभी को स्‍क्रीनिंग से गुजरने और उसमें स्‍वस्‍थ पाए जाने पर ही ट्रेन में बैठने दिया जाएगा। अगर किसी तरह के लक्षण मिलते हैं तो गृह राज्‍य के बजाय सीधे क्‍वारंटीन सेंटर या होम आइसोलेशन में भेजा जा सकता है। खाने पीने की व्यवस्था वही राज्य करेगा जिस राज्य से ये स्पेशल ट्रेनें चलें।

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