विगत कुछ समय में मध्यप्रदेश और राजस्थान में हो रहे राजनीतिक फेरबदल और निरंतर बदलते  घटनाक्रम में अब यह सवाल उठ रहा है कि आगे किन राज्यों में, कौन और कैसे विशेषकर कांग्रेस पार्टी को त्याग कर कहीं और सरकार बनाने की संभावना तलाश रहे हैं। जबकि मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया जो पार्टी के प्रमुख नेताओं में एक थे उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ते हुए कमलनाथ सरकार को खिलाकर शिवराज सिंह चौहान की सरकार के रूप में एक बार पुनः मध्यप्रदेश में कमल खिला दिया तो वही राजस्थान में सचिन पायलट जो वहां उपमुख्यमंत्री भी थे उन्होंने भी सरकार और पार्टी से अपना मोह त्याग करते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार को संशय की अवस्था में ला दिया है।

वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति यह है कि जब इतने बड़े और भी स्वास्थ्य नेताओं जिनके भरोसे कांग्रेस पार्टी अपना भविष्य तलाशने में थी उन्होंने ही कांग्रेस को भूत में भेजना शुरू कर दिया तो आगे किन राज्यों में और किन नेताओं पर पार्टी राजनीतिक नीव की भरोसा करे।

और भी कई राज्यों में जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं है वहां कांग्रेस, ED और CBI जैसी संस्थाओं पर भारत सरकार और बीजेपी का एजेंट के रूप में कार्य करने का आरोप लगा रही है।

अब यह तो समय बताएगा की भविष्य का राजनीतिक घटनाक्रम कहां और कैसे मोड़ लेता है और कांग्रेस के किन नेताओं अथवा अन्य पार्टियों के नेता पार्टी की नीव को हिलाने में सफल होंगे

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